बेहद चौका देने वाला मामला पूर्वी दिल्ली के पुरानी कोंडली इलाके से निकलकर हमारे सामने आया है। पप्पू कुमार नाम का व्यक्ति जो की पुरानी कोंडली के डी ब्लॉक का निवासी है। उसने 9 फरवरी 2024 को मयूर विहार फेस 3 में स्थित मधु गैस एजेंसी से सिलेंडर बुक किया। बुकिंग के बाद जब उनके घर पर सिलेंडर पहुंचा, तब उन्होंने सिलेंडर पर लगी सील को चेक किया। सील बिल्कुल ठीक थी, उसके बाद उन्होंने डिलीवरी मैन से सिलेंडर का वजन करने के लिए कहा। डिलीवरी मैन ने सिलेंडर को तौल कर उसका वजन 30 किलो दिखा दिया। लेकिन पप्पू कुमार लगभग पिछले 3 सालों से परेशान थे, कि वजन पूरा होने के बाद भी उनके घर में गैस 20 दिन से ज्यादा क्यों नहीं चलती है। डिलीवरी मैन द्वारा वजन किए जाने से पप्पू कुमार संतुष्ट नहीं हुए, उन्होंने तुरंत सिलेंडर को नजदीक की एक दुकान पर ले जाकर जब तौला, तो वह हैरान रह गए। सिलेंडर का वजन 26 किलो 600 ग्राम था। मतलब साफ हो गया लगभग 3 किलो 400 ग्राम गैस चोरी कर ली गई थी। यह देखते ही डिलीवरी मैन ने उनसे कहा कि, आप यह सिलेंडर मुझे वापस दे दो, मैं आपको दूसरा सिलेंडर दे देता हूं। लेकिन पप्पू कुमार ने अब की ठान लिया था कि मैं समझौता नहीं करूंगा, क्योंकि इसी तरीके से पहले भी उन्होंने कई बार अपने घर आए सिलेंडर से गैस चोरी की शिकायत डिलीवरी मैन से की थी। लेकिन उन्हें समझा बूझाकर मामले को शांत कर दिया गया था। इसी बात को देखते हुए पप्पू कुमार ने एजेंसी में फोन करके इस बात की शिकायत की और बताया कि उनके घर पहुंचने वाले सिलेंडर से रास्ते में ही गैस चोरी कर ली गई है। पहले तो उन्हें फोन करके एजेंसी के कुछ कर्मचारियों ने दबाव बनाने का प्रयास किया और उनसे कहा कि आप किसी भी तरह समझौता कर लो। जब पप्पू कुमार ने समझौता करने से मना कर दिया, तब उन्हें एक व्यक्ति अपने आपको इंडेन गैस का कर्मचारी बता कर फोन करके समझौता करने के लिए बोलता है। जब पप्पू समझौता करने से इनकार कर देते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है। उन्हें कहा जाता है कि तेरे अंदर जितनी भी गर्मी है, मिनट से पहले निकाल दी जाएगी। वरना अपनी शिकायत वापस ले ले और समझौता कर ले। इसके बाद पप्पू ऑनलाइन दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर इस बात की शिकायत करते हैं, जिसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस प्रकार की घटना राजधानी दिल्ली में होना आम बात है। आपने भी कहीं ना कहीं देखा होगा डिलीवरी मैन और एजेंसी मालिकों की मिली भगत से खुलेआम गैस की चोरी की जाती हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल एजेंसी मालिकों के ऊपर उठता है। जब ऐसा कोई मामला आता है तो वह इन सब चीजों से अनजान बनकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, और गाज गिरती है, डिलीवरी मैन के ऊपर। वह भी कुछ दिन के लिए उसे काम पर से हटा दिया जाता है। अपने देखा होगा राजधानी दिल्ली की विभिन्न कॉलोनी में गली-गली में बड़े गैस सिलेंडर से छोटे सिलेंडरों को भरा जाता है। जो कि कम से कम 110/- रूपए प्रति किलो के हिसाब से गैस बेचते हैं। अब सवाल यह उठता है कि उन दुकानदारों के पास इतने सारे गैस सिलेंडर, आखिर आते कहां से हैं। हम आपको बताते हैं जो गैस आपके सिलेंडर से चुराई हुई होती है, उस गैस को इन दुकानदारों को अच्छे खासे दामों में बेच दिया जाता है। कई बार देखा गया है कि सिलेंडर के ऊपर जो सील कंपनी द्वारा लगी होती है, उसे लाइटर से गर्म करके आराम से उतार लिया जाता है, गैस चोरी करने के बाद वापस उसी तरीके से उसे लगा दिया जाता है। इसका समाधान बेहद ही आसान है, लेकिन गैस कंपनियां शायद जानबूझकर सिलेंडर के ऊपर कच्ची सील लगातीं हैं। जिससे साफ जाहिर होता है कि नीचे से ऊपर तक सब भ्रष्ट हैं। हालांकि हम इस बात का दावा नहीं कर रहे हैं। लेकिन लोगों की अपनी-अपनी राय है, उनके कहे अनुसार ही हम यह बात कह रहे हैं। जिस प्रकार आपने देखा होगा दवाइयों की पैकिंग के लिए इंजेक्शन की शीशी पर जो सील लगी होती है ठीक वैसे ही अल्युमिनियम की सील सिलेंडर के ढक्कन के ऊपर भी लगाई जा सकती है लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। क्योंकि अल्युमिनियम की सील यदि लगा दी जाएगी, तो वह सील गैस चोरी करने वाला हटाएगा, तो दोबारा उसे नहीं लगा सकेगा। जबकि प्लास्टिक की सील को आराम से गर्म करके हटा लिया जाता है, और गैस चोरी करने के बाद उसे वापस उसी तरीके से लगा दिया जाता है, जिसका खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। अब जरूरत है लोगों को आवाज उठाने की जिससे की कंपनियों के कानों तक यह आवाज जाए, और वह सिलेंडर के ऊपर लगने वाली सील को अल्युमिनियम की करें, या अन्य किसी तरीके से ऐसा करें जिससे कि गैस चोरी ना हो सके। कंपनियों के लिए यह कोई बड़ा काम नहीं है। बावजूद इसके सिलेंडरों पर सील लगाने में कोताही बरती जाती है। फिलहाल तो यह मामला मधु गैस एजेंसी से जुड़ा है। लेकिन रोजाना ना जाने कितनी गैस एजेंसियों के ऊपर ऐसे आरोप लगते रहते हैं। लेकिन लोग कानूनी पचड़े में ना पड़ने के कारण, इन चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं। जिससे एजेंसी मालिकों और गैस चोरी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते रहते हैं।
गैस एजेंसी से चलकर आपकी किचन तक पहुंचने वाले सील पैक सिलेंडर से कैसे चोरी की जाती है गैस। देखिए इस वीडियो में।
बेहद चौका देने वाला मामला पूर्वी दिल्ली के पुरानी कोंडली इलाके से निकलकर हमारे सामने आया है। पप्पू कुमार नाम का व्यक्ति जो की पुरानी कोंडली के डी ब्लॉक का निवासी है। उसने 9 फरवरी 2024 को मयूर विहार फेस 3 में स्थित मधु गैस एजेंसी से सिलेंडर बुक किया। बुकिंग के बाद जब उनके घर पर सिलेंडर पहुंचा, तब उन्होंने सिलेंडर पर लगी सील को चेक किया। सील बिल्कुल ठीक थी, उसके बाद उन्होंने डिलीवरी मैन से सिलेंडर का वजन करने के लिए कहा। डिलीवरी मैन ने सिलेंडर को तौल कर उसका वजन 30 किलो दिखा दिया। लेकिन पप्पू कुमार लगभग पिछले 3 सालों से परेशान थे, कि वजन पूरा होने के बाद भी उनके घर में गैस 20 दिन से ज्यादा क्यों नहीं चलती है। डिलीवरी मैन द्वारा वजन किए जाने से पप्पू कुमार संतुष्ट नहीं हुए, उन्होंने तुरंत सिलेंडर को नजदीक की एक दुकान पर ले जाकर जब तौला, तो वह हैरान रह गए। सिलेंडर का वजन 26 किलो 600 ग्राम था। मतलब साफ हो गया लगभग 3 किलो 400 ग्राम गैस चोरी कर ली गई थी। यह देखते ही डिलीवरी मैन ने उनसे कहा कि, आप यह सिलेंडर मुझे वापस दे दो, मैं आपको दूसरा सिलेंडर दे देता हूं। लेकिन पप्पू कुमार ने अब की ठान लिया था कि मैं समझौता नहीं करूंगा, क्योंकि इसी तरीके से पहले भी उन्होंने कई बार अपने घर आए सिलेंडर से गैस चोरी की शिकायत डिलीवरी मैन से की थी। लेकिन उन्हें समझा बूझाकर मामले को शांत कर दिया गया था। इसी बात को देखते हुए पप्पू कुमार ने एजेंसी में फोन करके इस बात की शिकायत की और बताया कि उनके घर पहुंचने वाले सिलेंडर से रास्ते में ही गैस चोरी कर ली गई है। पहले तो उन्हें फोन करके एजेंसी के कुछ कर्मचारियों ने दबाव बनाने का प्रयास किया और उनसे कहा कि आप किसी भी तरह समझौता कर लो। जब पप्पू कुमार ने समझौता करने से मना कर दिया, तब उन्हें एक व्यक्ति अपने आपको इंडेन गैस का कर्मचारी बता कर फोन करके समझौता करने के लिए बोलता है। जब पप्पू समझौता करने से इनकार कर देते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है। उन्हें कहा जाता है कि तेरे अंदर जितनी भी गर्मी है, मिनट से पहले निकाल दी जाएगी। वरना अपनी शिकायत वापस ले ले और समझौता कर ले। इसके बाद पप्पू ऑनलाइन दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर इस बात की शिकायत करते हैं, जिसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस प्रकार की घटना राजधानी दिल्ली में होना आम बात है। आपने भी कहीं ना कहीं देखा होगा डिलीवरी मैन और एजेंसी मालिकों की मिली भगत से खुलेआम गैस की चोरी की जाती हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल एजेंसी मालिकों के ऊपर उठता है। जब ऐसा कोई मामला आता है तो वह इन सब चीजों से अनजान बनकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, और गाज गिरती है, डिलीवरी मैन के ऊपर। वह भी कुछ दिन के लिए उसे काम पर से हटा दिया जाता है। अपने देखा होगा राजधानी दिल्ली की विभिन्न कॉलोनी में गली-गली में बड़े गैस सिलेंडर से छोटे सिलेंडरों को भरा जाता है। जो कि कम से कम 110/- रूपए प्रति किलो के हिसाब से गैस बेचते हैं। अब सवाल यह उठता है कि उन दुकानदारों के पास इतने सारे गैस सिलेंडर, आखिर आते कहां से हैं। हम आपको बताते हैं जो गैस आपके सिलेंडर से चुराई हुई होती है, उस गैस को इन दुकानदारों को अच्छे खासे दामों में बेच दिया जाता है। कई बार देखा गया है कि सिलेंडर के ऊपर जो सील कंपनी द्वारा लगी होती है, उसे लाइटर से गर्म करके आराम से उतार लिया जाता है, गैस चोरी करने के बाद वापस उसी तरीके से उसे लगा दिया जाता है। इसका समाधान बेहद ही आसान है, लेकिन गैस कंपनियां शायद जानबूझकर सिलेंडर के ऊपर कच्ची सील लगातीं हैं। जिससे साफ जाहिर होता है कि नीचे से ऊपर तक सब भ्रष्ट हैं। हालांकि हम इस बात का दावा नहीं कर रहे हैं। लेकिन लोगों की अपनी-अपनी राय है, उनके कहे अनुसार ही हम यह बात कह रहे हैं। जिस प्रकार आपने देखा होगा दवाइयों की पैकिंग के लिए इंजेक्शन की शीशी पर जो सील लगी होती है ठीक वैसे ही अल्युमिनियम की सील सिलेंडर के ढक्कन के ऊपर भी लगाई जा सकती है लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। क्योंकि अल्युमिनियम की सील यदि लगा दी जाएगी, तो वह सील गैस चोरी करने वाला हटाएगा, तो दोबारा उसे नहीं लगा सकेगा। जबकि प्लास्टिक की सील को आराम से गर्म करके हटा लिया जाता है, और गैस चोरी करने के बाद उसे वापस उसी तरीके से लगा दिया जाता है, जिसका खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। अब जरूरत है लोगों को आवाज उठाने की जिससे की कंपनियों के कानों तक यह आवाज जाए, और वह सिलेंडर के ऊपर लगने वाली सील को अल्युमिनियम की करें, या अन्य किसी तरीके से ऐसा करें जिससे कि गैस चोरी ना हो सके। कंपनियों के लिए यह कोई बड़ा काम नहीं है। बावजूद इसके सिलेंडरों पर सील लगाने में कोताही बरती जाती है। फिलहाल तो यह मामला मधु गैस एजेंसी से जुड़ा है। लेकिन रोजाना ना जाने कितनी गैस एजेंसियों के ऊपर ऐसे आरोप लगते रहते हैं। लेकिन लोग कानूनी पचड़े में ना पड़ने के कारण, इन चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं। जिससे एजेंसी मालिकों और गैस चोरी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते रहते हैं।