फ़र्रुख़ाबाद : गंगा की बाढ़ में फंसी गर्भवती की मौत, नाव पर ही थमीं सांसें – शव को देर रात सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फ़र्रुख़ाबाद (उत्तर प्रदेश): जिले में गंगा नदी की बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस आपदा के बीच शुक्रवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला जमुना खातून (32 वर्ष) को परिजन नाव से अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन नाल से छह किलोमीटर का सफर तय करने के दौरान ही महिला की मौत हो गई।

नाव पर शुरू हुआ सफर, शहर पहुंचने से पहले मौत

मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के गंगा किनारे बसे गांव पंखियन की मईया में बाढ़ का पानी कई फीट तक भर गया है। गांव निवासी जरीफ मोहम्मद की पत्नी जमुना खातून गर्भवती थीं। शुक्रवार तड़के उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव की आशा बहू साइया ने तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह दी।पति और परिवार के पांच-छह लोग गर्भवती को चारपाई पर लिटाकर नाव से शहर के लिए रवाना हुए। लेकिन बाढ़ के कारण तेज बहाव और पानी से भरे रास्तों में नाव को छह किलोमीटर की यात्रा पूरी करने में करीब चार घंटे लग गए। शहर से सटे गांव धारा नगरी तक पहुंचने से पहले ही जमुना की सांसें थम गईं।

मजार पर रखा गया शव, देर रात सुपुर्द-ए-खाक

परिजन जब शहर के मोहल्ला बड़ा बंगशपुरा स्थित दूल्हा शाह की मजार तक पहुंचे, तो गांव के ही बाढ़ पीड़ितों की मदद से शव को नाव से उतारकर वहीं रख दिया गया। सूचना पाकर प्रभारी तहसीलदार सनी क्रनौजिया टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पति जरीफ अहमद ने बताया कि देर रात शव को गांव में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

कमालगंज में बाढ़ ने तोड़ा हरदोई का रास्ता

उधर, फ़र्रुख़ाबाद के कमालगंज क्षेत्र में बाढ़ के पानी से हरदोई जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बह गया है। इससे जिले का संपर्क बाधित हो गया है और आवागमन प्रभावित है।

बाढ़ में डूबकर ग्रामीण की मौत

इसी बीच शमसाबाद थाना क्षेत्र के गांव वाजिदपुर में एक और हादसा हुआ। गांव निवासी राजवीर (55 वर्ष) शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जानवर चराने गए थे। तभी वे अचानक बाढ़ के गहरे पानी में डूब गए। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

गंगा और रामगंगा का जलस्तर

जिले में गंगा का जलस्तर तीसरे दिन भी स्थिर बना हुआ है।वहीं, रामगंगा नदी के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण अब भी इटावा-बरेली हाईवे पर अस्थायी तौर पर डेरा जमाए हुए हैं।

दिल्ली में आवारा कुत्तों पर सर्जिकल स्ट्राइक! रोहिणी की मासूम की मौत के बाद सरकार का बड़ा ऐक्शन।

नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों का आतंक अब जानलेवा साबित हो चुका है। रोहिणी के पूठ कलां इलाके में 6 वर्षीय छवि शर्मा की रेबीज़ से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है।

30 जून को स्कूल से लौटते समय आवारा कुत्ते के हमले का शिकार बनी छवि ने 25 जुलाई को अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिवार ने नगर निगम (MCD) पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा—“अगर समय पर कार्रवाई होती तो आज हमारी बेटी ज़िंदा होती।

—सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

इस घटना ने न सिर्फ़ दिल्ली सरकार, बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी झकझोर दिया। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली-NCR से 8 हफ़्तों में सभी आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया और साफ कहा कि “यह पूरी समस्या अधिकारियों की नाकामी का नतीजा है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो ज़िम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई होगी

सरकार का स्पेशल ऑपरेशन दिल्ली सरकार और MCD ने मिलकर ऑपरेशन डॉग कैच शुरू कर दिया है। सुबह से देर रात तक टीमें सड़कों पर गश्त कर रही हैं। पहले ही दिन 350 से ज़्यादा कुत्ते पकड़े गए। हर जोन में टारगेट सेट किया गया है। कम से कम 150 से 200 कुत्ते प्रतिदिन पकड़ने का लक्ष्य रखा गया।

कहां और कैसे रखे जाएंगे ये कुत्ते?

पकड़े गए कुत्तों को किसी भी हालत में मारा नहीं जाएगा। इन्हें विशेष आश्रयों (Dog Shelters) और Animal Birth Control (ABC) Centres में ले जाया जाएगा, जहां सभी कुत्तों का होगा वैक्सीनेशन: सभी कुत्तों को रेबीज़ और अन्य बीमारियों के टीके लगाए जाएंगे।

माइक्रोचिपिंग: हर कुत्ते की पहचान के लिए माइक्रोचिप लगाई जाएगी।

बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन: प्रजनन क्षमता रोकने के लिए सर्जरी की जाएगी।

क्वारंटीन ज़ोन: बीमार या आक्रामक कुत्तों को अलग रखा जाएगा।

लंबी अवधि की देखभाल: MCD के मौजूदा 16 डॉग शेल्टर और NGO के सहयोग से बनाए जा रहे

12 नए शेल्टर में इन्हें रखा जाएगा।

MCD के अनुसार, कई बड़े शेल्टर Ghoga Dairy, Geeta Colony, Tikri Kalan, और Dwarka Sector-28 में तैयार हो चुके हैं।

जनता की राय बंटी हुई“ये कदम ज़रूरी है, बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले। –

रोहिणी निवासी“कुत्तों को मारना नहीं चाहिए, पर उनकी संख्या नियंत्रित करना अनिवार्य है। –

लक्ष्मी नगर की एक पशु-प्रेमी—क्यों है ये ज़रूरी?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक साल में दिल्ली में कुत्तों के काटने के 58,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए हैं। सिर्फ़ 2025 में अब तक 14 मौतें रेबीज़ से हो चुकी हैं।

रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया दिल्ली पुलिस का हेड कांस्टेबल! ₹15,000 की घूस लेते ही गिरफ़्तार।

नई दिल्ली — दिल्ली पुलिस के विजिलेंस यूनिट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। बाराखंबा रोड स्थित विजिलेंस टीम ने थाना बिंदापुर में तैनात हेड कांस्टेबल विजय सिंह को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता— जो रामापार्क, मोहन गार्डन का निवासी है और द्वारका में वेलनेस प्रोडक्ट का कारोबार करता है— ने विजिलेंस ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि हेड कांस्टेबल विजय सिंह उसके दफ्तर आया और कहा कि उसके खिलाफ शिकायत है। इसके बाद उसने ₹15,000 महीने की “सेटिंग” मांगी।

डर और दबाव में आकर शिकायतकर्ता ने ₹15,000 दे भी दिए। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ— विजय सिंह ने आगे ₹30,000 और मांग लिए, यह कहते हुए कि यह दो महीने का “बकाया” है। शिकायत मिलते ही विजिलेंस यूनिट के डीसीपी के निर्देशन में एक टीम बनाई गई।

8 अगस्त 2025 को द्वारका मोड़, पुलिस बूथ के पास बाज़ार परिसर में जाल बिछाया गया। ऑपरेशन के दौरान विजय सिंह ने जैसे ही ₹15,000 की घूस ली, विजिलेंस टीम ने मौके पर पकड़ लिया।

बरामद हुई रकम तुरंत जब्त कर ली गई। मामले में FIR संख्या 16/2025 धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 9 अगस्त 2025 को दर्ज की गई। आरोपी को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज के सामने पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

विजिलेंस की अपील: अगर कोई पुलिसकर्मी आपसे रिश्वत मांगता है तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज करें।

“सांसद की चेन 48 घंटे में… हमारी तो सालों से गुम! क्या यही है वीआईपी न्याय?

https://youtu.be/z74eXjme2jE?si=fc1B5qq2lwKWseFR

“दिल्ली का वीआईपी इलाका… चाणक्यपुरी। वो इलाका जहाँ हर मोड़ पर सुरक्षा का पहरा, हर गली में सीसीटीवी, और हर कदम पर रहती है पुलिस की पैनी नज़र।

दिनांक 4 अगस्त 2025 की सुबह, तमिलनाडु की सांसद आर. सुधा जब टहल रही थीं, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनके गले से सोने की चेन झपट ली। सांसद ज़मीन पर गिर पड़ीं, चोट लगी, कपड़े फट गए, और पूरा मामला राजधानी की सुरक्षा पर सवाल बन गया।—

घटनाक्रम की समयरेखा

4 अगस्त सुबह: वारदात उच्च-सुरक्षा ज़ोन में।

तुरंत बाद: सांसद का गुस्सा — गृह मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र, “अगर यहां मैं सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा?

“पुलिस ऐक्शन मोड में: सीसीटीवी खंगाले, टेक्निकल टीमों की तैनाती।

6 अगस्त: महज़ 48 घंटे में आरोपी सोहन सिंह रावत गिरफ्तार।चेन बरामद, स्कूटी, मोबाइल और वारदात में पहनी टोपी तक मिल गई।

—वीआईपी बनाम आम जनता — दो कहानियां, एक पुलिस

दिल्ली पुलिस की इस ‘ZIP–SNATCH–ZOOM’ कार्रवाई को देखकर आम आदमी के मन में सवाल उठना लाज़िमी है —हमारे केस में ये रफ़्तार क्यों नहीं?

दिल्ली के आंकड़े: 2025 के पहले 6 महीनों में 2,503 चेन/मोबाइल स्नैचिंग रोज़ाना औसतन 14 FIR। लेकिन असलियत? कई केस में FIR दर्ज ही नहीं होती, और जो होती हैं, उनमें बरामदगी ‘दुर्लभ उपलब्धि’ है।

कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं: असल में रोज़ 40–41 स्नैचिंग होती हैं, यानी 1,250+ केस महीना, लेकिन ज्यादातर दबा दिए जाते हैं।

पुणे उदाहरण: 2024 में 125 केस में सिर्फ 47 सुलझे — बाकी हवा।

पंचकुला: जनवरी–अप्रैल 2025 में 27 केस, सुलझने की दर सिर्फ 25.9% — साल दर साल गिरावट।

स्पष्ट भेदभाव?

सांसद का मामला —

✅ FIR दर्ज तुरंत

✅ 48 घंटे में गिरफ्तारी

✅ चेन, स्कूटी, मोबाइल, कपड़े तक बरामद

आम आदमी का मामला —

❌ FIR में टालमटोल

❌ आरोपी का नाम तक अज्ञात रहना

❌ बरामदगी तो छोड़िए, केस सालों लटका रहता है—

सवाल जो चुभते हैं

क्या पुलिस की प्राथमिकता इंसान की जान-माल की सुरक्षा है या उसके पद और पहचान के हिसाब से तय होती है?क्या वीआईपी का पालतू कुत्ता भी गुम हो जाए तो पूरी मशीनरी एक हो जाती है, और आम आदमी की चेन/मोबाइल पर “देखते हैं” कहकर फाइल बंद हो जाती है?

—कटु निष्कर्ष

1. वीआईपी केस = फास्ट ट्रैक, मीडिया फोकस, 100% ऐक्शन।

2. आम केस = धीमी जांच, आधे-अधूरे नतीजे, बरामदगी की गुंजाइश नाममात्र।

3. जब तक केस का हल पीड़ित की पहचान देखकर होगा, तब तक चेन सिर्फ गले से नहीं, जनता के भरोसे से भी झपटी जाती रहेगी।

4. “यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि यहाँ कानून की धाराएँ ताक़तवर के लिए ढाल बन जाती हैं और गरीब के लिए बोझ। रसूख वालों की आवाज़ पुलिस के कानों में गूंजती है, तो केस ‘फास्ट ट्रैक’ हो जाता है। लेकिन गरीब? उसकी फरियाद थाने की दीवारों में गुम हो जाती है। हमारे सिस्टम में इंसाफ़ का तराज़ू अक्सर झुक जाता है — और झुकता भी हमेशा वहीं, जहाँ ताक़त, पैसा और पहचान खड़ी होती है।”

5.यह हमारे सिस्टम की सबसे कड़वी सच्चाई है

—जहाँ रसूख और पद के सामने गरीब की पीड़ा सिर्फ एक “केस नंबर” बनकर रह जाती है।

कानून की किताब में सब बराबर हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में गरीब की आवाज़ अक्सर फाइलों में दब जाती है, और रसूख वाले की बात तुरंत एक्शन में बदल जाती है।यही कारण है कि चंद घंटों में वीआईपी की चेन मिल जाती है, और आम जनता सालों तक अपनी बरामदगी का इंतज़ार करती रहती है।

अब सवाल यह खड़ा होता है कि कानून सबके लिए बराबर है या पहचान और पद देखकर कानून बदल जाता है।

“पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर चेन बरामद करने के बाद भले ही अपनी पीठ थपथपाई हो, लेकिन इस वीआईपी-स्टाइल कार्रवाई ने पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों वही स्पीड, वही तत्परता आम जनता के मामलों में नज़र नहीं आती? क्या इंसाफ़ भी अब पहचान और रसूख देखकर दिया जाएगा?”

https://youtu.be/z74eXjme2jE?si=DvB0z8sNRxJ7xswK

“महिला पत्रकार पर हमला: SHO ने FIR से किया इनकार, पत्रकारिता की आज़ादी पर सीधा वार”

News24media — महिला पत्रकार पर हमला, धमकी और बदसलूकी, SHO पर आरोप कि FIR दर्ज करने से किया इनकार।

पूर्वी दिल्ली में एक बार फिर से पुलिस की कार्यशैली और अपराधियों के हौसले पर सवाल खड़े हो गए हैं।

News24Media की रिपोर्टर चेतना चौधरी के साथ ड्यूटी के दौरान खुलेआम बदसलूकी, मारपीट और धमकी का मामला सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक, 29 जुलाई 2025 को चेतना चौधरी अपने कैमरामैन के साथ न्यूज़ कवरेज के लिए सीलमपुर रेलवे लाइन के पास स्थित अवैध झुग्गियों को तोड़े जाने के बाद दोबारा से वहां अवैध रूप से मकान का निर्माण किया जा रहा था। इस बात की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंची थीं।

इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की, उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की और गंभीर धमकियां दीं। चेतना चौधरी ने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आरोपियों को पकड़ने की बजाय उल्टा पीड़िता को समझौते का दबाव बनाया। SHO कृष्णा नगर पर आरोप है कि उन्होंने साफ शब्दों में कहा— “मेरे खिलाफ जो करना है करो, मैं FIR दर्ज नहीं करूंगा।”

यह बयान न केवल कानून की खुली अवहेलना है, बल्कि महिला पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

चेतना चौधरी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर आरोपियों की गिरफ्तारी, SHO की भूमिका की विभागीय जांच और तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक महिला के सम्मान का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र की आवाज पर हमला है।

पत्रकारों में रोष

मीडिया संगठनों ने इस बात की कड़ी निंदा की। इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों में आक्रोश है। वे मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पुलिस विभाग के उन अधिकारियों को भी दंडित किया जाए जिन्होंने FIR दर्ज करने से इनकार किया।

“सांसद के गले से चेन झपट ली गई… और दिल्ली पुलिस बस ‘शिकायत लिखवाने’ की सलाह देती रही!”

📍 दिल्ली की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, इस बार खुद संसद सदस्य बनीं शिकार!
🗓️ तारीख – 4 अगस्त 2025
🕕 समय – सुबह 6:15 से 6:20 के बीच
📍 स्थान – पोलैंड एम्बेसी, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली


नई दिल्ली से बड़ी खबर!
तमिलनाडु की लोकसभा सांसद एडवोकेट आर. सुधा, जो संसद सत्र में हिस्सा लेने राजधानी आई थीं, आज सुबह चाणक्यपुरी के हाई-प्रोफाइल इलाके में लूट की शिकार बन गईं। यह इलाका वीआईपी और विदेशी दूतावासों से भरा पड़ा है – फिर भी दिल्ली पुलिस अपराधियों को रोकने में नाकाम रही।

क्या हुआ था?
सांसद आर. सुधा और राज्यसभा सदस्य राजती मैडम रोज़ की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकली थीं। पोलैंड एम्बेसी के गेट-3 और गेट-4 के पास अचानक फुल हेलमेट पहने एक व्यक्ति स्कूटी से आया और सांसद के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गया।

👉 इस हमले में सांसद के गले पर चोटें आईं और उनका चुड़ीदार फट गया।

💬 “मैंने गिरने से खुद को संभाला और मदद के लिए चिल्लाई,” सांसद ने बताया।


पुलिस क्या कर रही थी?


कुछ देर बाद एक मोबाइल पुलिस पेट्रोलिंग वाहन को उन्होंने रोका। उम्मीद थी कि एफआईआर तुरंत लिखी जाएगी और अपराधी की तलाश शुरू होगी, लेकिन…

दिल्ली पुलिस ने कहा:
🗣️ “आप लिखित शिकायत दीजिए और संबंधित थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराइए।”

यानि एक महिला सांसद को चेन स्नैचिंग और घायल होने के बाद भी थाना-दर-थाना भटकना होगा?


🔍 गंभीर सवाल जो उठते हैं:

  1. जब विदेशी एम्बेसी वाले वीवीआईपी इलाके में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की क्या बिसात?
  2. दिल्ली पुलिस सिर्फ गश्त करती है या अपराध रोकने की भी कोई ज़िम्मेदारी है?
  3. क्या महिला सांसद की शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया गया?

🧨 सियासी भूचाल तय!
अब देखना यह होगा कि केंद्रीय गृह मंत्री इस पर क्या एक्शन लेते हैं। क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी या फिर यह केस भी “आदतन कार्रवाई” की भीड़ में गुम हो जाएगा?


📣 आपका क्या कहना है?
क्या दिल्ली की सड़कों पर महिलाएं और जन प्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं बचे हैं?

दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा सेवानिवृत्त, सतीश गोल्छा को सौंपी गई कमान। जानिए अगला आयुक्त कौन हो सकता है?

31 जुलाई 2025 | नई दिल्ली,

दिल्ली पुलिस महकमे में आज बड़ा फेरबदल देखने को मिला। दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा, जो 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं, आज अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके रिटायरमेंट के साथ ही दिल्ली पुलिस के शीर्ष पद पर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

— अगला परमानेंट पुलिस कमिश्नर कौन होगा?

सतीश गोल्छा को मिला एडिशनल चार्ज

संजय अरोड़ा की सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद, केंद्र सरकार ने तिहाड़ जेल के महानिदेशक (DG) सतीश गोल्छा को एडिशनल चार्ज के रूप में दिल्ली पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि यह जिम्मेदारी अस्थायी है, जब तक कि केंद्र सरकार नए स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति नहीं कर देती।सतीश गोल्छा 1992 बैच के AGMUT कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और उनकी गिनती तेज-तर्रार और अनुशासित अधिकारियों में की जाती है। उन्होंने इससे पहले भी दिल्ली पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

—🔍 कौन बन सकता है अगला स्थायी दिल्ली पुलिस कमिश्नर?

सवाल अब यह है कि दिल्ली पुलिस की कमान किसके हाथ में जाएगी? सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रमुख नामों की चर्चा जोरों पर है:

1️⃣ सतीश गोल्छावर्तमान DG तिहाड़ जेल और अब एडिशनल चार्ज वाले आयुक्त — यदि सरकार का अनुभव पर भरोसा रहा तो वे परमानेंट कमिश्नर बनाए जा सकते हैं।

2️⃣ प्रवीर रंजन1993 बैच के आईपीएस अधिकारी, पूर्व में दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (क्राइम) रह चुके हैं। फिलहाल CISF में Special DG हैं। मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

3️⃣ अन्य नामों की भी चर्चावीरेंद्र सिंह, नुज़हत हसन और एस.बी.के. सिंह जैसे AGMUT कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी संभावित सूची में हैं। साथ ही, किसी बाहरी कैडर के वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति भी हो सकती है — जैसा कि पूर्व में राकेश अस्थाना और संजय अरोड़ा के समय देखा गया था।—

🎯 निष्कर्ष

दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह एक अहम मोड़ है। राजधानी की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को दिशा देने वाली सबसे बड़ी कुर्सी पर अब नई नियुक्ति की प्रतीक्षा है। आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय किसे यह जिम्मेदारी सौंपता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

👉 आपको क्या लगता है, अगला दिल्ली पुलिस कमिश्नर कौन होगा? नीचे कमेंट करें और अपनी राय साझा करें!

“तलाक की धमकी के बाद पति ने खा लिया ज़हर” – एक बार मासूम बेटी से बात करने की थी तमन्ना!

💔हमीरपुर (उत्तर प्रदेश):“तुमसे छुटकारा चाहिए!” – पत्नी की ये एक लाइन संजय सिंह को अंदर तक झकझोर गई। जिस पति ने ई-रिक्शा चलाकर हर हाल में अपने परिवार को संभाला, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा।सिर्फ इसलिए कि वो अपनी छोटी बेटी की एक झलक पाना चाहता था।

25 वर्षीय संजय सिंह, हमीरपुर के शीतलपुर मोहल्ले में रहने वाला एक ईमानदार ई-रिक्शा चालक था। बीते कई महीनों से उसका पत्नी से विवाद चल रहा था। पत्नी अपनी डेढ़ साल की बेटी को लेकर मायके चली गई थी, और अब तलाक की धमकी दे रही थी।—

📲 वीडियो कॉल पर बात करने की कोशिश बनी मौत की वजह!

बीते सोमवार को संजय ने पत्नी को वीडियो कॉल किया, और सिर्फ यही कहा –”मैं बेटी को देखना चाहता हूं…”लेकिन जवाब में मिला गुस्सा, झगड़ा और तलाक की धमकी। पत्नी की बातों से टूट चुके संजय ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और ज़हरीला पदार्थ खा लिया। जब मुंह से झाग निकलता देख परिजन कमरे में पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

—😔 15 दिन पहले ससुराल गया था पत्नी को लाने, हुई थी पिटाई!

संजय की ज़िंदगी पहले से ही तनाव में थी। 15 दिन पहले जब वह पत्नी को मनाने ससुराल गया था, वहां ससुराल पक्ष ने उसे पकड़कर पीट दिया। उसके बाद से संजय और भी ज्यादा डिप्रेशन में चला गया था।

—🕵️‍♀️ जांच में जुटी पुलिस –

परिवार में पसरा मातमघटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।—

AI बना साइबर ठगों का हथियार: मिनटों में बैंक अकाउंट हो रहे खाली, OpenAI के CEO की बड़ी चेतावनी!”

OpenAI के CEO की बड़ी चेतावनी!”


नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर बैंक और वित्तीय संस्थान AI से भी ज्यादा स्मार्ट नहीं बने, तो आम जनता की जिंदगी भर की कमाई चुटकियों में साफ हो सकती है।

दरअसल, हाल ही में हुई फेडरल रिजर्व कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए ऑल्टमैन ने कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी AI का इस्तेमाल करके इतने शातिर तरीके से काम कर रहे हैं कि पारंपरिक सुरक्षा उपाय जैसे पासवर्ड, OTP और वॉयस ऑथेंटिकेशन भी बेअसर हो चुके हैं।


AI कैसे बन रहा है बैंक फ्रॉड का जरिया?

आजकल के AI से लैस हैकर्स महज कुछ मिनटों में बैंकिंग सिस्टम को चकमा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि AI के माध्यम से अब न सिर्फ किसी की आवाज की हूबहू नकल कर कॉल की जाती है, बल्कि फर्जी वेबसाइट, नकली ईमेल, और डीपफेक वीडियो के जरिए लोगों की निजी जानकारी चोरी की जा रही है।

अब तो हालत यह हो गई है कि AI बॉट्स खुद से कॉल करके ग्राहक की आवाज की नकल करते हैं, उनका भरोसा जीतते हैं और निजी जानकारी जैसे OTP, अकाउंट नंबर आदि ले लेते हैं। और फिर कुछ ही मिनटों में खाता खाली कर देते हैं।


नया खतरा: Deepfake और Voice Cloning

AI तकनीक इतनी विकसित हो चुकी है कि आज असली और नकली आवाज या चेहरा पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है। वॉयसप्रिंट ऑथेंटिकेशन जैसी पहले सुरक्षित मानी जाने वाली तकनीकें अब धोखा खा रही हैं। AI से बनाए गए डीपफेक वीडियो और फेस रिकॉग्निशन की नकल से सुरक्षा प्रणाली को सीधे चुनौती दी जा रही है।


AI बना ‘साइबर ठगों का नया हथियार’

Generative AI का दायरा अब सिर्फ रचनात्मक लेखन या इमेज जनरेशन तक सीमित नहीं रहा। अब यह अपराधियों के लिए स्क्रिप्ट लिखने, फर्जी कॉल्स करने, नकली दस्तावेज तैयार करने, और पहचान छिपाने जैसे कामों में इस्तेमाल हो रहा है।

सैम ऑल्टमैन के अनुसार, AI ने साइबर अपराधियों को पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बना दिया है। अब धोखाधड़ी केवल तकनीकी हमला नहीं, बल्कि मानसिक खेल (psychological warfare) बन चुका है।


क्या है समाधान?

सैम ऑल्टमैन ने सलाह दी कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अब पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर AI-आधारित सुरक्षा तकनीकों जैसे:

बिहेवियरल ऑथेंटिकेशन

रीयल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन

AI से संचालित सिक्योरिटी बॉट्स

को अपनाना होगा। इसके अलावा ग्राहकों को भी जागरूक करना होगा कि वे कभी भी कॉल, SMS या ईमेल के माध्यम से अपनी निजी जानकारी साझा न करें।


निष्कर्ष:

AI ने जहां दुनिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, वहीं यह एक दोधारी तलवार भी बन चुका है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह तकनीक हमारे सबसे बड़े दुश्मन का रूप भी ले सकती है।
अब वक्त आ गया है कि बैंकिंग सेक्टर को सिर्फ स्मार्ट नहीं, बल्कि AI से भी ज्यादा स्मार्ट बनना होगा।


क्या आप भी AI से जुड़े खतरे को महसूस कर रहे हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें!


राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: अब होटल में ठहरने से पहले नाबालिगों की सूचना परिजनों तक जरूरी होगा भेजना।

जयपुर: राजस्थान सरकार ने होटल और लॉजिंग में हो रही लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए नया आदेश जारी किया है। अब अगर कोई 18 साल से कम उम्र का लड़का या लड़की किसी होटल या आश्रम में ठहरता है, तो उसकी जानकारी उसके माता-पिता या अभिभावक तक पहुंचाना अनिवार्य होगा। साथ ही ठहरने वाले का पहचान पत्र और सक्रिय मोबाइल नंबर होटल रजिस्टर में दर्ज करना जरूरी होगा।यह अहम आदेश गृह विभाग के सचिव रवि शर्मा द्वारा राज्यभर के सभी होटलों, गेस्ट हाउसों और आश्रमों को जारी किया गया है। इसका मकसद नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राज्य में बच्चों से जुड़े अपराधों को रोकना है।

🚨 सख्त नियम, सख्त कार्रवाई –

अब कोई बहाना नहीं चलेगा!अधिकारियों का कहना है कि कई बार बिना किसी जांच-पड़ताल के नाबालिगों को रूम दे दिया जाता है, जिसका गलत फायदा अपराधी तत्व उठाते हैं। इसीलिए अब हर होटल, लॉज और धर्मशाला को अनिवार्य रूप से:नाबालिग ठहरने वालों की सूचना उनके परिजनों को देनी होगी।पहचान पत्र की फोटोकॉपी और मोबाइल नंबर रजिस्टर में संलग्न करना होगा।संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को देनी होगी।होटल रजिस्टर और ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड, जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को मुहैया कराने होंगे।

-🔍 क्या बदलेगा इस नियम से?

यह कदम न सिर्फ अपराधों की रोकथाम करेगा, बल्कि मानव तस्करी, लापता बच्चों और नशे से जुड़े नेटवर्क पर भी लगाम लगाने में मदद करेगा। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में यह आदेश अपराधियों की धरपकड़ में कारगर साबित होगा।—📢 अब हर होटल को करनी होगी सख्ती से फॉलो!जहां बड़े होटलों में कुछ हद तक यह व्यवस्था पहले से ही लागू थी, वहीं अब छोटे और मिड-लेवल होटलों को भी इस आदेश का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को उसके प्रेमी संग होटल के कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा। जमकर हुआ बवाल।

गोरखपुर: होटल के कमरे में आपत्तिजनक हालत में पकड़े गए प्रेमी, सड़क पर हुआ जमकर विवाद।

गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र स्थित बरगदहीं इलाके में एक होटल उस समय लोगों की नजरों में आ गया, जब रविवार की सुबह एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को एक अन्य युवक के साथ संदिग्ध अवस्था में पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला बरेली के एक दंपती से जुड़ा है।

पति को था संदेह, किया पीछा

सूत्रों के अनुसार, पति को पहले से अपनी पत्नी के व्यवहार पर शक था। रविवार को वह चुपचाप उसका पीछा करता हुआ फोरलेन किनारे स्थित एक होटल तक पहुंच गया। जब वह होटल के कमरे में दाखिल हुआ, तो वहां का दृश्य देखकर वह हैरान रह गया।

कमरे से बाहर निकलते ही शुरू हुआ हंगामा

पति ने अपनी पत्नी को अपने ही एक पूर्व सहकर्मी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। इसके बाद तीनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई जो होटल के बाहर सड़क तक पहुंच गई। लगभग एक घंटे तक चली इस बहस को राहगीरों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।

पुराना परिचित निकला प्रेमी

पति ने बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से भटहट क्षेत्र में एक फर्नीचर की दुकान पर कार्यरत है और उसका एक पांच वर्षीय बेटा भी है। तीन साल पहले जीशान नाम का युवक उसकी दुकान पर काम सीखने आया था। यहीं से उसकी पत्नी से जान-पहचान बढ़ी और यह रिश्ता धीरे-धीरे गहराता गया।

प्लानिंग के साथ पकड़ा गया दोनों को

रविवार को जीशान ने बरेली जाने का बहाना बनाया और होटल में रुक गया। कुछ समय बाद महिला भी वहां पहुंच गई। पति ने पीछा करते हुए दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। सूचना मिलते ही महिला के परिजन भी मौके पर पहुंच गए, जिससे माहौल और गर्म हो गया। हालांकि, लोगों को वीडियो बनाते देख तीनों वहां से चुपचाप चले गए और पुलिस के आने से पहले ही मामला शांत हो गया।

गैस एजेंसी से चलकर आपकी किचन तक पहुंचने वाले सील पैक सिलेंडर से कैसे चोरी की जाती है गैस। देखिए इस वीडियो में।

जैसा कि आप सभी जानते हैं राजधानी दिल्ली हो या देश का कोई भी राज्य हो। आज के दौर में महंगाई की मार से कोई भी अछूता नहीं है। लेकिन यदि बात की जाए, रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों की, तो सबसे पहले ध्यान आता है, रसोई गैस का। यानी हम बात कर रहे हैं, एलपीजी गैस की, जिसके बिना शहरों में रहने वाले किसी भी परिवार का गुजारा नहीं है। जो कि लगभग ₹1000 का प्रति सिलेंडर एजेंसी के माध्यम से भरा हुआ हमारी किचन तक पहुंचता है। ₹1000 का भुगतान करने के बाद भी एजेंसी से आपकी किचन तक, जो एल पी जी का सिलेंडर पहुंचता है, उस सिलेंडर से रास्ते में ही गैस चोरी कर ली जाए, तो निश्चित तौर पर आपको लगेगा कि, आपकी जेब पर डाका डाल दिया गया है। जी हां आप सही सुन रहे हैं। क्योंकि जिस वक्त डिलीवरी मैन आपके घर तक या आपकी किचन तक गैस से भरा हुआ सिलेंडर पहुंचाता है, तो जाहिर सी बात है सबसे पहले आप सिलेंडर पर लगी सील को चेक करते होंगे, उसके बाद भी यदि आप संतुष्ट नहीं होते होंगे, तो शायद डिलीवरी मैन के पास सिलेंडर तौलने के लिए जो कांटा मौजूद होता है, आप उस पर सिलेंडर का वजन करवा कर संतुष्ट हो जाते होंगे, और सोचते होंगे कि, हां मेरे यहां सिलेंडर सही सलामत पहुंचा है। लेकिन ऐसा नहीं होता।
बेहद चौका देने वाला मामला पूर्वी दिल्ली के पुरानी कोंडली इलाके से निकलकर हमारे सामने आया है। पप्पू कुमार नाम का व्यक्ति जो की पुरानी कोंडली के डी ब्लॉक का निवासी है। उसने 9 फरवरी 2024 को मयूर विहार फेस 3 में स्थित मधु गैस एजेंसी से सिलेंडर बुक किया। बुकिंग के बाद जब उनके घर पर सिलेंडर पहुंचा, तब उन्होंने सिलेंडर पर लगी सील को चेक किया। सील बिल्कुल ठीक थी, उसके बाद उन्होंने डिलीवरी मैन से सिलेंडर का वजन करने के लिए कहा। डिलीवरी मैन ने सिलेंडर को तौल कर उसका वजन 30 किलो दिखा दिया। लेकिन पप्पू कुमार लगभग पिछले 3 सालों से परेशान थे, कि वजन पूरा होने के बाद भी उनके घर में गैस 20 दिन से ज्यादा क्यों नहीं चलती है। डिलीवरी मैन द्वारा वजन किए जाने से पप्पू कुमार संतुष्ट नहीं हुए, उन्होंने तुरंत सिलेंडर को नजदीक की एक दुकान पर ले जाकर जब तौला, तो वह हैरान रह गए। सिलेंडर का वजन 26 किलो 600 ग्राम था। मतलब साफ हो गया लगभग 3 किलो 400 ग्राम गैस चोरी कर ली गई थी। यह देखते ही डिलीवरी मैन ने उनसे कहा कि, आप यह सिलेंडर मुझे वापस दे दो, मैं आपको दूसरा सिलेंडर दे देता हूं। लेकिन पप्पू कुमार ने अब की ठान लिया था कि मैं समझौता नहीं करूंगा, क्योंकि इसी तरीके से पहले भी उन्होंने कई बार अपने घर आए सिलेंडर से गैस चोरी की शिकायत डिलीवरी मैन से की थी। लेकिन उन्हें समझा बूझाकर मामले को शांत कर दिया गया था। इसी बात को देखते हुए पप्पू कुमार ने एजेंसी में फोन करके इस बात की शिकायत की और बताया कि उनके घर पहुंचने वाले सिलेंडर से रास्ते में ही गैस चोरी कर ली गई है। पहले तो उन्हें फोन करके एजेंसी के कुछ कर्मचारियों ने दबाव बनाने का प्रयास किया और उनसे कहा कि आप किसी भी तरह समझौता कर लो। जब पप्पू कुमार ने समझौता करने से मना कर दिया, तब उन्हें एक व्यक्ति अपने आपको इंडेन गैस का कर्मचारी बता कर फोन करके समझौता करने के लिए बोलता है। जब पप्पू समझौता करने से इनकार कर देते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है। ‌ उन्हें कहा जाता है कि तेरे अंदर जितनी भी गर्मी है, मिनट से पहले निकाल दी जाएगी। वरना अपनी शिकायत वापस ले ले और समझौता कर ले। इसके बाद पप्पू ऑनलाइन दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर इस बात की शिकायत करते हैं, जिसमें अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस प्रकार की घटना राजधानी दिल्ली में होना आम बात है। आपने भी कहीं ना कहीं देखा होगा डिलीवरी मैन और एजेंसी मालिकों की मिली भगत से खुलेआम गैस की चोरी की जाती हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल एजेंसी मालिकों के ऊपर उठता है। जब ऐसा कोई मामला आता है तो वह इन सब चीजों से अनजान बनकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, और गाज गिरती है, डिलीवरी मैन के ऊपर। वह भी कुछ दिन के लिए उसे काम पर से हटा दिया जाता है। अपने देखा होगा राजधानी दिल्ली की विभिन्न कॉलोनी में गली-गली में बड़े गैस सिलेंडर से छोटे सिलेंडरों को भरा जाता है। जो कि कम से कम 110/- रूपए प्रति किलो के हिसाब से गैस बेचते हैं।‌ अब सवाल यह उठता है कि उन दुकानदारों के पास इतने सारे गैस सिलेंडर, आखिर आते कहां से हैं। हम आपको बताते हैं जो गैस आपके सिलेंडर से चुराई हुई होती है, उस गैस को इन दुकानदारों को अच्छे खासे दामों में बेच दिया जाता है। कई बार देखा गया है कि सिलेंडर के ऊपर जो सील‌ कंपनी द्वारा लगी होती है, उसे लाइटर से गर्म करके आराम से उतार लिया जाता है, गैस चोरी करने के बाद वापस उसी तरीके से उसे लगा दिया जाता है। इसका समाधान बेहद ही आसान है, लेकिन गैस कंपनियां शायद जानबूझकर सिलेंडर के ऊपर कच्ची सील लगातीं हैं। जिससे साफ जाहिर होता है कि नीचे से ऊपर तक सब भ्रष्ट हैं। हालांकि हम इस बात का दावा नहीं कर रहे हैं। लेकिन लोगों की अपनी-अपनी राय है, उनके कहे अनुसार ही हम यह बात कह रहे हैं। जिस प्रकार आपने देखा होगा दवाइयों की पैकिंग के लिए इंजेक्शन की शीशी पर जो सील लगी होती है ठीक वैसे ही अल्युमिनियम की सील सिलेंडर के ढक्कन के ऊपर भी लगाई जा सकती है लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। क्योंकि अल्युमिनियम की सील यदि लगा दी जाएगी, तो वह सील गैस चोरी करने वाला हटाएगा, तो दोबारा उसे नहीं लगा सकेगा। जबकि प्लास्टिक की सील को आराम से गर्म करके हटा लिया जाता है, और गैस चोरी करने के बाद उसे वापस उसी तरीके से लगा दिया जाता है, जिसका खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। अब जरूरत है लोगों को आवाज उठाने की जिससे की कंपनियों के कानों तक यह आवाज जाए, और वह सिलेंडर के ऊपर लगने वाली सील को अल्युमिनियम की करें, या अन्य किसी तरीके से ऐसा करें जिससे कि गैस चोरी ना हो सके। कंपनियों के लिए यह कोई बड़ा काम नहीं है। बावजूद इसके सिलेंडरों पर सील लगाने में कोताही बरती जाती है। फिलहाल तो यह मामला मधु गैस एजेंसी से जुड़ा है। लेकिन रोजाना ना जाने कितनी गैस एजेंसियों के ऊपर ऐसे आरोप लगते रहते हैं। लेकिन लोग कानूनी पचड़े में ना पड़ने के कारण, इन चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं। जिससे एजेंसी मालिकों और गैस चोरी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते रहते हैं।

पूर्वी दिल्ली के थाना पांडव नगर इलाके में 27 वर्षीय युवक के ऊपर चाकुओं से किया गया था जानलेवा हमला। होश में आते ही युवक ने किया चौका देने वाला खुलासा।

पूर्वी दिल्ली: एक पीड़ित और उसके परिजनों ने हमारे चैनल के माध्यम से, दिल्ली पुलिस के तमाम आला अधिकारियों से, और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर महोदय से गुहार लगाई है कि, कृपया इस वीडियो में मेरी आवाज को ध्यान से सुनिए। इस वक्त यह व्यक्ति, पूर्वी दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में, जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। साथ ही हिम्मत करके, यह चार आरोपियों के नाम बता रहा है, जिन्होंने इसकी जान लेने की कोशिश की है। उसने स्पष्ट शब्दों में बताया कि, मेरे ऊपर चाकू से हमला करने वाले अमन, राजू, गंजू, और शिवम नाम के, चार लड़के हैं। जिनको पुलिस ने गिरफ्तार करने की बजाय खुला छोड़ रखा है। पीड़ित युवक का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिक बच्चों को गिरफ्तार किया है, जिनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। साथ ही पीड़ित युवक और उसके परिजनों का आरोप है कि, आरोपियों का पुलिस की मिली भगत से, नशे का काला कारोबार चलता है, जिसके चलते, उनकी पुलिस से अच्छी सांठ-गांठ है। इसी कारण पुलिस को मोटी रकम पहुंचाई गई, और इस मामले में नाबालिक बच्चों को, जानबूझकर सामने लाया गया। जिनको पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी बताकर सलाखों के पीछे भेज दिया है। नाबालिकों की ऐसे मामलों में आसानी से जमानत हो जाती है। ‌ कई मामलों में पाया गया है कि शातिर अपराधी ऐसे नाबालिकों का गैर कानूनी कामों में उनको हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। जबकि मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की मदद से खुला घूम रहे हैं।


पूर्वी दिल्ली के थाना पांडव नगर क्षेत्र में लगातार दूसरी बड़ी वारदात को दिया गया अंजाम।


प्राप्त जानकारी के अनुसार 27 जनवरी को थाना पांडव नगर क्षेत्र के मयूर विहार फेस 1 में सुप्रीम एनक्लेव के ठीक सामने एक युवक को गोली मार दी गई थी। जिसमें अभी आरोपियों की सर गर्मी से तलाश जारी थी इसी दौरान 28 जनवरी की रात को समय लगभग 11:30 27 वर्षीय अनुज नामक युवक के ऊपर चाकू से कई वार किए गए। जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई उसे तुरंत नजदीकी लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है फिलहाल उसका इलाज जारी है। इन घटनाओं को देखते हुए लगता है कि राजधानी दिल्ली में अपराधियों के हौसले काफी बुलंद दिखाई पड़ रहे हैं। अपराधियों में पुलिस का और कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में अभी तक दो नाबालिक युवकों को गिरफ्तार किया है। जिनका इस मामले से कोई संबंध ही नहीं था। घायल युवक ने चार आरोपियों के नाम मीडिया के सामने बताए हैं। पीड़ित का कहना है कि अमन, गंजू, राजू और शिवम ने मिलकर मेरे ऊपर चाकू से जानलेवा हमला किया था। जो कि इस समय खुलेआम घूम रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों का अवैध रूप से नशा बेचने का कारोबार है। जो कि पुलिस की मिली भगत से थाना पांडव नगर इलाके में लंबे समय से फलफूल रहा है। आरोपियों के परिजनों की पुलिस से अच्छी सांठ-गांठ होने के कारण इस मामले में पुलिस ने जानबूझकर नाबालिक बच्चों को जेल भेज दिया जिससे कि आसानी से उनकी जमानत हो सके। पीड़ित ने मीडिया को बताया कि मुझे और मेरे परिवार की जान को लगातार खतरा बना हुआ है क्योंकि मुख्य आरोपी पुलिस की मदद से खुला घूम रहे हैं। उसने मीडिया और दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों से इंसाफ की गुहार लगाई है, पीड़ित परिजनों का कहना है 27 वर्षीय अनुज शशी गार्डन के जवाहर मोहल्ले में अपने मामा मामी के साथ पिछले 2 सालों से रह रहा था और वह पेशे से कैब चालक है। 28 जनवरी की रात को समय लगभग 11:30 वह अपने घर से दूध लेने के लिए निकला तभी रास्ते में एक घर के बाहर कुछ लोग जन्मदिन मना रहे थे। जैकी शराब के नशे में थे, उन्हीं लोगों से अनुज की कुछ कहा सुनी हो गई। जिसके चलते चार युवकों (अमन, राजू, गंजू और शिवम) ने मिलकर 27 वर्षीय अनुज के ऊपर चाकू से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला कर दिया। जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। उसे तुरंत लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस का दावा है अनुज के मामा ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया उनका कहना है कैमरे के सामने आने से अपराधियों को मेरी पहचान हो सकती है। जिसके बाद मेरी भी जान को खतरा हो सकता है। अनुज के मामा की इन बातों को देख कर लगता है कि अपराधियों का खौफ राजधानी दिल्ली में किस कदर कायम हो रहा है।‌ अपराधियों का खौफ इतना बढ़ चुका है। जोकि पीड़ित व्यक्ति भी उनके खिलाफ बोलने से डर रहा है। इसी बात के चलते अपराधियों को आसानी से जमानत मिल जाती है। उनके खिलाफ कोई भी गवाही देने की हिम्मत नहीं कर पाता।

दिल्ली पुलिस के कई एसएचओ का हुआ तबादला, किस थाने का कौन एसएचओ? यहां देखिए पूरी लिस्ट..



नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। दिल्ली के कई थाना प्रभारियों यानी SHO का ट्रांसफर इधर से उधर हो गया है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर से एक लंबी लिस्ट जारी की गई है। इस लिस्ट में ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले थाना प्रभारियों की जानकारी है। दिल्ली में क्राइम कंट्रोल को पहले से और बेहतर बनाने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर से यह बड़ा फैसला लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, जिन थाना प्रभारियों का नाम ट्रांसफर वाली लिस्ट में है, वह काफी लंबे समय से एक ही थाने में तैनात थे। दिल्ली के सभी थानों को और ज्यादा ऐक्टिव मोड पर लाने के लिए यह फैसला लिया गया है। दिल्ली पुलिस के थाना प्रभारियों के ट्रांसफर के बाद दिल्ली थानों की कार्यप्रणाली को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। आपके इलाके में अब कौन एसएचओ हैं, इसका पता करने के लिए आप लिस्ट देख सकते हैं।